Skip to main content

Teaching Aptitude MCQs in Hindi with Answers for UGC NET JRF Paper 1

Teaching Aptitude MCQs in Hindi with Answers for UGC NET JRF Paper 1Teaching Aptitude mcq for ugc net, Teaching Aptitude mcq for set exam, Teaching Aptitude mcq questions, Teaching Aptitude mcq in hindi, Teaching aptitude mcq for b.ed entrance.

Teaching Aptitude MCQ Part-3 

1. अब तक आपने जो शिक्षा प्राप्त की है, वह-

(1) केवल समय बिताने वाली है

(2) उपयोगी एबं मूल्यवान है

(3) नौकरी देने में असमर्थ है

(4) नैतिकता से एकदम शून्य नहीं है

 

2. शिक्षा उत्तम वही है, जो-

(1) व्यक्ति को नौकरी दिला सके

(2) धर्म की रक्षा कर सके

(3) व्यक्ति का सर्वांगीण विकास कर सके

(4) व्यक्ति को विद्वान्‌ बना सके

 

3. शिक्षा सर्वाधिक सहायक है, व्यक्ति के-

(1) सामाजिक विकास में

(2) मानसिक विकास में

(3) नैतिक विकास में

(4) सर्वांगीण विकास में

 

4. शिक्षा के लिए उपयुक्त है-

(1) वर्तमान परीक्षा प्रणाली

(2) सेमिस्टर पद्धति

(3) सपुस्तक परीक्षा

(4) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

5. अध्यापक की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता है-

(1) समाजसेवा

(2) देशभक्ति

(3) कठोर परिश्रम

(4) विषयज्ञान

 

6. आपके विचार में वह शिक्षक महान है-

(1) जो लच्छेदार वाक्यशैली से युक्त है

(2) जिसके कथनी और करनी में समानता है

(3) जो उच्च आदर्शपूर्ण बातों पर बल देता है

(4) जो लोगों के साथ मिल जुल कर रहता है

 

7. शिक्षक यदि पाठय-पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य पुस्तकों को भी पढ़ता है, तो-

(1) उसके समय का सदुपयोग होता है

(2) उसका ज्ञान सर्वांगीण हो जाता है

(3) अनुसन्धान कार्य में सहायता मिलती है

(4) आत्मसन्तोष प्राप्त होता है

 

8. कोई विद्यार्थी किसी अध्यापक को बहुत सम्मान देता है, क्योंकि अध्यापक-

(1) उस विद्यार्थी का रिश्तेदार है

(2) उसके पास बहुत सी डिग्रियाँ हैं

(3) उसके पढ़ाने का स्तर बहुत ऊँचा है

(4) वह अच्छी तरह पढ़ता है

 

9. आप अपने छात्रों के साथ कैसा सम्बन्ध रखना चाहते हैं?

(1) मित्रवत्‌

(2) पुत्रवत्‌

(3) एक अपरिचित व्यक्ति जैसा

(4) छात्र की जैसी आयु होगी, वैसा ही सम्बन्ध रखेंगे

 

10. नीचे कुछ गुणों की लिस्ट दी गई है-

(a) पर्यवेक्षण की आतुरता

(b) दृढ़ता

(c) उद्यम

(d) विश्वास

(e) तार्किक दलील

एक शोध वैज्ञानिक के लिए आप उपर्युक्त गुणों में किसे-किसे आवश्यक मानेंगे?

(1) (a), (b), (c), (d)

(2) (b), (c), (d), (e)

(3) (a), (b), (c), (e)

(4) (a), (c), (d), (e)

 

11. नीचे कुछ गतिविधियाँ दी गयी हैं, जिसे अध्यापक क्रियान्वित करता है-

(a) परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए छात्रों की सहायता

(b) छात्रों को सीखने के लिए प्रेरणा

(c) समय पर पाठ-योजना पूरा कराना

(d) प्रिंसिपल की आज्ञा को लागू करना

(e) कॉलेज प्रबन्ध को सहायता देना

वरीयता के आधार पर निम्नलिखित विधियों के किस योग को अध्यापक द्वारा अपनाया जाना चाहिए ?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (b), (d)

(3) (b), (c), (d)

(4) (b), (c), (e)

 

12. अध्यापन-दक्षता की कुछ आवश्यक बातें नीचे दी गई हैं-

(a) कालेज परीक्षा के संचालन में सहायता करना

(b) सीखने वाले समूहों को अभिप्रेरित करना

(c) कक्षप्रबन्ध को सुधारना

(d) विषय-वस्तु को जानना

(e) कालेज प्रशासन में रुचि लेना

निम्नलिखित में से अध्यापन-दक्षता का कौन-सा योग सर्वाधिक उचित है?

(1) (a), (b), (e)

(2) (a), (b), (d)

(3) (b), (c), (e)

(4) (b), (c), (d)

 

13. नीचे कुछ गतिविधियों को प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें लेक्चर की विकास अवस्था में अपनाया जा सकता है?

(a) सादृश्य का प्रयोग

(b) पूर्वज्ञान का परीक्षण

(c) नियत कार्य का देना

(d) दृष्टन्तों का प्रयोग

(e) सहायक सामग्री द्वारा समझाना

लेक्चर की विकास अवस्था में निम्न में से कौन-सा योग सर्वाधिक उचित है?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (b), (d)

(3) (a), (d), (e)

(4) (b), (d), (e)

 

14. नीचे एक प्रभावकारी परीक्षण की कुछ विशिष्टताएँ दी गई हैं-

(a) औचित्य

(b) लम्बाई

(c) सुसंगति

(d) भाषा

(e) वस्तुपरकता

मूल्यांकन के लिए सबसे प्रभावशाली परीक्षण की विशिष्टता का निम्न में से कौन-सा योग सर्वाधिक उचित है?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (b), (d)

(3) (a), (c), (e)

(4) (a), (b), (e)

 

15. नीचे एक पाठ के कुछ मनोवैज्ञानिक अनुक्रम दिए गए हैं, जिसे एक अध्यापक को अनुसरण करना हैं

(a) परिचित से अपरिचित

(b) सामान्य से गूढ़

(c) सफल अनुभव को निश्चित करना (पुरस्कारात्मक)

(d) आगमिक से निगमिक

(e) अनजान से जाना हुआ

पाठ के मनोवैज्ञानिक अनुक्रम का कौन-सा योग सर्वाधिक उचित है, जिसे एक अध्यापक को अपनाना है?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (c), (d)

(3) (a), (c), (e)

(4) (a), (b), (e)

 

16. नीचे शिक्षकों के कुछ गुणों का उल्लेख किया गया है-

(a) विषय-वस्तु का ज्ञान

(b) प्रभावी मौखिक सम्प्रेषण

(c) सुखद उपस्थिति

(d) छात्रों के आदर का पात्र होना

(e) समुदाय के नेताओं के आदर का पात्र होना

किसी प्रभावी शिक्षक में गुणों के निम्नांकित मेलों में मे कौनसा मेल होना चाहिए?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (b), (d)

(3) (a), (c), (e)

(4) (a), (b), (e)

 

17. यहाँ पर कुछ भूमिकाओं का उल्लेख किया गया है, जिसे अध्यापक को कक्षा में निभाना होता है?

(a) सहकारी अधिगम को प्रोत्साहन देना

(b) कार्योन्मुख शिक्षण

(c) अधिगम कर्ताओं का अभिप्रेरण

(d) प्रबन्धक के निर्देशों का पालन करना

(e) कक्षा में व्याख्यान देना

निम्नलिखित दिए गए मेलों में से कक्षा में अध्यापक की भूमिकाओं का कौनसा मेल सर्वाधिक उपयुक्त है?'

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (b), (d)

(3) (a), (c), (e)

(4) (b), (c), (e)

 

18. नीचे किसी व्याख्यान के चरण से सम्बन्धित कुछ क्रियाओं का उल्लेख किया गया है-

(a) प्रस्तुत प्रकरण को भावी अधिगम से सम्बद्ध करना

(b) प्रस्तुत प्रकरण को पूर्वपठित प्रकरण से सम्बद्ध करना

(c) छात्रों में रुचि जगाना और उन्हें अभिप्रेरित करना

(d) पूर्वज्ञान को जाँचना

(e) विषयवस्तु संक्षेपण

किसी व्याख्यान के प्रारम्भिक चरण के लिए निम्नलिखित - में से कौन-सा मेल सर्वाधिक उपयुक्त है?

(1) (a), (b), (c)

(2) (b), (c), (d)

(3) (c), (d), (e)

(4) (a), (c), (e)

 

19. यहाँ पर व्याख्यान के दृढ़ीकरण चरण से सम्बन्धित कुछ क्रियाओं का उल्लेख किया गया है-

(a) पुनरीक्षण अथवा संक्षेपण करना

(b) छात्र अधिगम की जाँच करना

(c) गृहकार्य देना

(d) छात्रों में पाठ के प्रति रुचि जाग्रत करना

(e) छात्रों को अन्वेषण के लिए अभिप्रेरित करना

व्याख्यान के दृढ़ीकरण चरण के लिए निम्नलिखित में से क्रियाओं का कौनसा मेल सर्वाधिक उपयुक्त है?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (b), (d)

(3) (c), (d), (e)

(4) (a), (c), (e)

 

20. नीचे किसी व्याख्यान की प्रस्तुति-शैली से सम्बन्धित कुछ कौशलों का उल्लेख किया गया है-

(a) संप्रेक्षण-वर्द्धक युक्तियों का प्रयोग

(b) उद्दीपकों में विविधता

(c) छात्रों का अभिप्रेरण

(d) पूर्वज्ञान-परीक्षण

(e) प्रश्न पूछने के कौशल

व्याख्यान के प्रस्तुतीकरण शैली से सम्बन्धित शिक्षण कौशलों के निम्नांकित मेलों में से कौनसा सर्वाधिक उपुयक्त है?

(1) (a), (b), (c)

(2) (a), (c), (d)

(3) (b), (c), (e)

(4) (a), (c), (e)

 

21. यहाँ पर किसी व्याख्यान के दौरान सम्प्रेषण-प्रक्रिया के कुछ पक्षों का उल्लेख किया गया है-

(a) विपर्यय

(b) मूल्यांकन

(c) संकेन्द्रण

(d) निदर्शन

(e) अतिरंजन

किसी सन्देश के विरूपण से बचने के लिए सम्प्रेषण प्रक्रिया - के निम्नांकित मेलों में से कौनसा मेल सर्वाधिक उपयुक्त होगा?

(1) (a), (b), (c)

(2) (b), (c), (d)

(3) (b), (c), (e)

(4) (c), (d), (e)

 

22. निम्नलिखित चार विकल्पों में से एक महाविद्यालय के अध्यापक के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भूमिका का चयन कीजिए-

(1) छात्रों को सामाजिक मुददों को समझाना

(2) छात्रों को सामाजिक मुददों पर स्वयं निर्णय लेने की क्षमता के विकास में सहायता देना

(3) सामाजिक मुददों के प्रति छात्रों की भावनाओं का पता लगाना

(4) छात्रों को सामाजिक मुद्दों पर सही स्थिति स्वीकार करने के लिए राजी करना

 

23. अध्यापक होने के नाते, आप अपने विषय पर पुस्तक लिखना चाहते हैं-

(1) अवकाश में पुस्तकालय जा करके, सम्बन्धित सामग्री का चयन करेंगे, और अपने मौलिक चिन्तन में सम्मिलित करेंगे

(2) बाजार में उपलब्ध पुस्तकों का अध्ययन करेंगे व उनकी कमियों को समझने का प्रयास करेंगे

(3) विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार सामग्री को व्यवस्थित व अभिक्रमित करेंगे व अपने अनुभवी साथियों से सलाह लेंगे

(4) उपर्युक्त सभी

 

24. बालक के आक्रामक व्यवहार को दूर किया जा सकता है, यदि-

(1) बालक को कुछ समय तक बिलकुल एकान्त में रखा जाए

(2) बालक को कठोर दण्ड दिया जाए

(3) बालक के आक्रामक व्यवहार के कारणों का पता लगा लिया जाए

(4) बालक की उपेक्षा की जाए

 

25. यदि कोई बालक पुस्तकालय से पुस्तकें चुराता है, तो-

(1) उसे कठोर दण्ड देना चाहिए, जिससे भयभीत होकर वह चोरी न करे

(2) उसे पुलिस का डर दिलाना चाहिए

(3) उसके इस व्यवहार के पीछे सन्निहित कारणों को ढूँढ़ना चाहिए

(4) उसे पर्याप्त पैसे एवं सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए

 

Answer- 1- (2), 2- (3), 3- (4), 4- (2), 5- (4), 6- (2), 7- (2), 8- (4), 9- (2), 10- (3), 11- (3), 12- (4), 13- (3), 14- (3), 15- (1), 16- (2), 17- (4), 18- (2), 19- (1), 20- (3), 21- (2), 22- (2), 23- (4), 24- (3), 25- (3)


Teaching Aptitude MCQ Part-1

Teaching Aptitude MCQ Part-2


Comments

Popular posts from this blog

"चक्र " - मानव शरीर में वर्णित शक्ति केन्द्र

7 Chakras in Human Body हमारे शरीर में प्राण ऊर्जा का सूक्ष्म प्रवाह प्रत्येक नाड़ी के एक निश्चित मार्ग द्वारा होता है। और एक विशिष्ट बिन्दु पर इसका संगम होता है। यह बिन्दु प्राण अथवा आत्मिक शक्ति का केन्द्र होते है। योग में इन्हें चक्र कहा जाता है। चक्र हमारे शरीर में ऊर्जा के परिपथ का निर्माण करते हैं। यह परिपथ मेरूदण्ड में होता है। चक्र उच्च तलों से ऊर्जा को ग्रहण करते है तथा उसका वितरण मन और शरीर को करते है। 'चक्र' शब्द का अर्थ-  'चक्र' का शाब्दिक अर्थ पहिया या वृत्त माना जाता है। किन्तु इस संस्कृत शब्द का यौगिक दृष्टि से अर्थ चक्रवात या भँवर से है। चक्र अतीन्द्रिय शक्ति केन्द्रों की ऐसी विशेष तरंगे हैं, जो वृत्ताकार रूप में गतिमान रहती हैं। इन तरंगों को अनुभव किया जा सकता है। हर चक्र की अपनी अलग तरंग होती है। अलग अलग चक्र की तरंगगति के अनुसार अलग अलग रंग को घूर्णनशील प्रकाश के रूप में इन्हें देखा जाता है। योगियों ने गहन ध्यान की स्थिति में चक्रों को विभिन्न दलों व रंगों वाले कमल पुष्प के रूप में देखा। इसीलिए योगशास्त्र में इन चक्रों को 'शरीर का कमल पुष्प” कहा ग...

हठयोग प्रदीपिका में वर्णित प्राणायाम

हठयोग प्रदीपिका में प्राणायाम को कुम्भक कहा है, स्वामी स्वात्माराम जी ने प्राणायामों का वर्णन करते हुए कहा है - सूर्यभेदनमुज्जायी सीत्कारी शीतल्री तथा।  भस्त्रिका भ्रामरी मूर्च्छा प्लाविनीत्यष्टकुंम्भका:।। (हठयोगप्रदीपिका- 2/44) अर्थात् - सूर्यभेदन, उज्जायी, सीत्कारी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्छा और प्लाविनी में आठ प्रकार के कुम्भक (प्राणायाम) है। इनका वर्णन ऩिम्न प्रकार है 1. सूर्यभेदी प्राणायाम - हठयोग प्रदीपिका में सूर्यभेदन या सूर्यभेदी प्राणायाम का वर्णन इस प्रकार किया गया है - आसने सुखदे योगी बदध्वा चैवासनं ततः।  दक्षनाड्या समाकृष्य बहिस्थं पवन शनै:।।  आकेशादानखाग्राच्च निरोधावधि क्रुंभयेत। ततः शनैः सव्य नाड्या रेचयेत् पवन शनै:।। (ह.प्र. 2/48/49) अर्थात- पवित्र और समतल स्थान में उपयुक्त आसन बिछाकर उसके ऊपर पद्मासन, स्वस्तिकासन आदि किसी आसन में सुखपूर्वक मेरुदण्ड, गर्दन और सिर को सीधा रखते हुए बैठेै। फिर दाहिने नासारन्ध्र अर्थात पिंगला नाडी से शनैः शनैः पूरक करें। आभ्यन्तर कुम्भक करें। कुम्भक के समय मूलबन्ध व जालन्धरबन्ध लगा कर रखें।  यथा शक्ति कुम्भक के प...

सांख्य दर्शन परिचय, सांख्य दर्शन में वर्णित 25 तत्व

सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल है यहाँ पर सांख्य शब्द का अर्थ ज्ञान के अर्थ में लिया गया सांख्य दर्शन में प्रकृति पुरूष सृष्टि क्रम बन्धनों व मोक्ष कार्य - कारण सिद्धान्त का सविस्तार वर्णन किया गया है इसका संक्षेप में वर्णन इस प्रकार है। 1. प्रकृति-  सांख्य दर्शन में प्रकृति को त्रिगुण अर्थात सत्व, रज, तम तीन गुणों के सम्मिलित रूप को त्रिगुण की संज्ञा दी गयी है। सांख्य दर्शन में इन तीन गुणो कों सूक्ष्म तथा अतेनद्रिय माना गया सत्व गुणो का कार्य सुख रजोगुण का कार्य लोभ बताया गया सत्व गुण स्वच्छता एवं ज्ञान का प्रतीक है यह गुण उर्ध्वगमन करने वाला है। इसकी प्रबलता से पुरूष में सरलता प्रीति,अदा,सन्तोष एवं विवेक के सुखद भावो की उत्पत्ति होती है।    रजोगुण दुःख अथवा अशान्ति का प्रतीक है इसकी प्रबलता से पुरूष में मान, मद, वेष तथा क्रोध भाव उत्पन्न होते है।    तमोगुण दुख एवं अशान्ति का प्रतीक है यह गुण अधोगमन करने वाला है तथा इसकी प्रबलता से मोह की उत्पत्ति होती है इस मोह से पुरूष में निद्रा, प्रसाद, आलस्य, मुर्छा, अकर्मण्यता अथवा उदासीनता के भाव उत्पन्न होते है सा...

योगवशिष्ठ ग्रन्थ का सामान्य परिचय

मुख्य विषय- 1. मनोदैहिक विकार, 2. मोक्ष के चार द्वारपाल, 3. ज्ञान की सप्तभूमि, 4. ध्यान के आठ अंग, 5. योग मार्ग के विघ्न, 6. शुक्रदेव जी की मोक्ष अवधारणा  1. योग वशिष्ठ के अनुसार मनोदैहिक विकार- मन के दूषित होने पर 'प्राणमय कोष' दूषित होता हैं, 'प्राणमय' के दूषित होने से 'अन्नमय कोष' अर्थात 'शरीर' दूषित होता है, इसे ही मनोदैहिक विकार कहते हैं:- मन -> प्राण -> अन्नमय (शरीर) योग वशिष्ठ के अनुसार आधि- व्याधि की अवधारणा- Concept of Adhis and Vyadhis आधि- अर्थात- मानसिक रोग > मनोदैहिक विकार > व्याधि- अर्थात- शारीरिक रोग आधि एवं व्याधि का संबंध पंचकोषों से है: आधि- (Adhis) 1. आनंदमय कोष:- इस कोष में स्वास्थ्य की कोई हानि नहीं होती इसमें वात, पित व कफ की समरूपता रहती है। 2. विज्ञानमय कोष:- इस कोष में कुछ दोषों की सूक्ष्म प्रक्रिया प्रारंभ होती है। इसमें अभी रोग नहीं बन पाते क्योंकि इसमें दोषों की प्रक्रिया ठीक दिशा में नहीं हो पाती। 3. मनोमय कोष:- इस कोष में वात, पित व कफ की असम स्थिति शुरू होती है यहीं पर 'आधि' की शुरुआत होती है। (आधि= मान...

चित्त विक्षेप | योगान्तराय

चित्त विक्षेपों को ही योगान्तराय ' कहते है जो चित्त को विक्षिप्त करके उसकी एकाग्रता को नष्ट कर देते हैं उन्हें योगान्तराय अथवा योग के विध्न कहा जाता।  'योगस्य अन्तः मध्ये आयान्ति ते अन्तरायाः'।  ये योग के मध्य में आते हैं इसलिये इन्हें योगान्तराय कहा जाता है। विघ्नों से व्यथित होकर योग साधक साधना को बीच में ही छोड़कर चल देते हैं। विध्न आयें ही नहीं अथवा यदि आ जायें तो उनको सहने की शक्ति चित्त में आ जाये, ऐसी दया ईश्वर ही कर सकता है। यह तो सम्भव नहीं कि विध्न न आयें। “श्रेयांसि बहुविध्नानि' शुभकार्यों में विध्न आया ही करते हैं। उनसे टकराने का साहस योगसाधक में होना चाहिए। ईश्वर की अनुकम्पा से यह सम्भव होता है।  व्याधिस्त्यानसंशयप्रमादालस्याविरतिभ्रान्तिदर्शनालब्धभूमिकत्वानवस्थितत्वानि चित्तविक्षेपास्तेऽन्तरायाः (योगसूत्र - 1/30) योगसूत्र के अनुसार चित्त विक्षेपों  या अन्तरायों की संख्या नौ हैं- व्याधि, स्त्यान, संशय, प्रमाद, आलस्य, अविरति, भ्रान्तिदर्शन, अलब्धभूमिकत्व और अनवस्थितत्व। उक्त नौ अन्तराय ही चित्त को विक्षिप्त करते हैं। अतः ये योगविरोधी हैं इन्हें योग के मल...

चित्त | चित्तभूमि | चित्तवृत्ति

 चित्त  चित्त शब्द की व्युत्पत्ति 'चिति संज्ञाने' धातु से हुई है। ज्ञान की अनुभूति के साधन को चित्त कहा जाता है। जीवात्मा को सुख दुःख के भोग हेतु यह शरीर प्राप्त हुआ है। मनुष्य द्वारा जो भी अच्छा या बुरा कर्म किया जाता है, या सुख दुःख का भोग किया जाता है, वह इस शरीर के माध्यम से ही सम्भव है। कहा भी गया  है 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्' अर्थात प्रत्येक कार्य को करने का साधन यह शरीर ही है। इस शरीर में कर्म करने के लिये दो प्रकार के साधन हैं, जिन्हें बाह्यकरण व अन्तःकरण के नाम से जाना जाता है। बाह्यकरण के अन्तर्गत हमारी 5 ज्ञानेन्द्रियां एवं 5 कर्मेन्द्रियां आती हैं। जिनका व्यापार बाहर की ओर अर्थात संसार की ओर होता है। बाह्य विषयों के साथ इन्द्रियों के सम्पर्क से अन्तर स्थित आत्मा को जिन साधनों से ज्ञान - अज्ञान या सुख - दुःख की अनुभूति होती है, उन साधनों को अन्तःकरण के नाम से जाना जाता है। यही अन्तःकरण चित्त के अर्थ में लिया जाता है। योग दर्शन में मन, बुद्धि, अहंकार इन तीनों के सम्मिलित रूप को चित्त के नाम से प्रदर्शित किया गया है। परन्तु वेदान्त दर्शन अन्तःकरण चतुष्टय की...

योगबीज

  Yoga Beej for UGC NET Yoga Exam योगबीज योगबीज ग्रंथ भगवान शिव के द्वारा कहा गया यह है, यह हठ योग परंपरा का पुरातन ग्रंथ है, योग के एक बीज के रूप में इस ग्रंथ को माना जाता है। भगवान शिव एवं माता पार्वती जी के संवाद रूप इस ग्रंथ में माता पार्वती प्रश्न करती हैं एवं भगवान शिव उनका उतर देते हैं। योगबीज में कुल 182 श्लोक है (कुछ पुस्तक में 190 भी लिखा हुआ प्राप्त होता है, इस ग्रन्थ में कोई भी अध्याय नहीं है। योगबीज के रचनाकार भगवान शिव एवं श्रोता माता पार्वती है। माता पार्वती जी को सुरेश्वरि भी योग बीज में कहा गया है। योगबीज में माता पार्वती मुख्य रूप से 12 प्रश्न करती है। योग बीज में सबसे प्रथम श्लोक में आदिनाथ शिव को प्रणाम किया गया है तथा इन्हे वृषभ नाथ भी इसमें कहा गया है। शिव को इसमें उत्पत्ति करता, पालक और संहार करता कहा गया है, और सभी क्सेशों को हरने बाला शिव को कहा गया है। 1- योगबीज के अनुसार - अहंकार के नष्ट होने से ही हमे मुक्ति (मोक्ष) की प्राप्ति होती है 2- योगबीज के अनुसार 5 प्राण होते है  (लेकिन इसमें 5 प्राण के नाम नहीं बताए गए है।) 3- योगबीज के अनुसार चित्त की शु...

UGC NET Yoga Previous year Question Paper PDF in Hindi

 UGC NET Yoga Previous year Question Paper in Hindi (Set-6) नोट :- इस प्रश्नपत्र में (25) बहुसंकल्पीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक है। सभी प्रश्न अनिवार्य ।   1. सर्वाइकल स्पॉडिलोसिस में कौन-से आसन नहीं करने चाहिये ? (a) मकरासन   (b) भुजंगासन (c) शशांकासन (d) पादहस्तासन कूट के अनुसार सही संयोजन चुनें : कूट : (1) (a) और (c) सही हैं।    (2) (c) और (d) सही हैं। (3) (a) और (b) सही हैं।    (4) (b) और (c) सही हैं। 2. निम्न में से कौन तनाव जनित रोग हैं ? (a) सिर-दर्द  (b) उच्च रक्तचाप (c) मधुमेह   (d) आँटिस्म कूट के अनुसार सही संयोजन चुनें : कूट : (1) (a), (b) और (c) सही हैं।     (2) (a), (b) और (c) सही हैं। (3) (b), (c) और (d) सही हैं।     (4) (a) और (d) सही हैं। 3. धनुरासन निम्न में से किन में निषिद्ध है ? (a) उच्च रक्तचाप    (b) विबन्ध (c) पेट का मोटापा    (d) हर्निया कूट के अनुसार सही संयोजन चुनें :   कूट : (1) (b) और (c) सही हैं। ...

MCQs for UGC NET YOGA (Yoga Upanishads)

1. "योगचूड़ामणि उपनिषद" में कौन-सा मार्ग मोक्ष का साधक बताया गया है? A) भक्तिमार्ग B) ध्यानमार्ग C) कर्ममार्ग D) ज्ञानमार्ग ANSWER= (B) ध्यानमार्ग Check Answer   2. "नादबिंदु उपनिषद" में किस साधना का वर्णन किया गया है? A) ध्यान साधना B) मंत्र साधना C) नादयोग साधना D) प्राणायाम साधना ANSWER= (C) नादयोग साधना Check Answer   3. "योगशिखा उपनिषद" में मोक्ष प्राप्ति का मुख्य साधन क्या बताया गया है? A) योग B) ध्यान C) भक्ति D) ज्ञान ANSWER= (A) योग Check Answer   4. "अमृतनाद उपनिषद" में कौन-सी शक्ति का वर्णन किया गया है? A) प्राण शक्ति B) मंत्र शक्ति C) कुण्डलिनी शक्ति D) चित्त शक्ति ANSWER= (C) कुण्डलिनी शक्ति Check Answer   5. "ध्यानबिंदु उपनिषद" में ध्यान का क...